जयपुर, 27 अप्रैल (भाषा) पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने थानों में अनिवार्य प्राथमिकी दर्ज करने के नियम को सख्ती से लागू किए जाने की मांग की है।
गहलोत के अनुसार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ‘अनिवार्य एफआईबार’ का नियम इसीलिए बनाया था ताकि पीड़ितों को न्याय मिलने का विश्वास रहे।
उन्होंने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू किया गया अनिवार्य प्राथमिकी का नियम अब भी सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि भिवाड़ी में दलित नाबालिग बालक के साथ पुलिस की बर्बरता अत्यंत अमानवीय है और भाजपा सरकार की दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। जयपुर के चिकित्सालय में बालक की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है।
गहलोत ने कहा, ‘यह निंदनीय है कि पुलिस ने परिजनों की प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की। नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली द्वारा पुलिस महानिदेशक से बात करने के बाद एफआईआर दर्ज हुई। ऐसे में न्याय की आशा कैसे की जा सकती है? यह एक गंभीर प्रश्न है।’
उन्होंने कहा, ‘पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ‘अनिवार्य प्राथमिकी’ का नियम इसीलिए बनाया था ताकि पीड़ितों को न्याय मिलने का विश्वास रहे। इस कारण अपपाध के आंकड़े भले ही बढ़े परंतु पीड़ितों को न्याय मिलना सुनिश्चित हुआ और शिकायत लेकर जयपुर आने वाले पीड़ितों की संख्या बेहद कम हो गई।’
गहलोत के अनुसार, ‘किंतु वर्तमान में राजस्थान की स्थिति ऐसी हो गई है जहां दलित और महिलायें न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। मुख्यमंत्री को अविलंब इस प्रकरण में हस्तक्षेप करना चाहिए एवं दोषियों के विरुद्ध ऐसी कठोर कार्रवाई हो जो एक मिसाल कायम करे। साथ ही, अनिवार्य प्राथमिकी की व्यवस्था को पूरी तरह लागू किया जाए।’
भाषा पृथ्वी रंजन
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