न्यूजक्लिक मामला: न्यायालय ने यूएपीए मामले में गिरफ्तारी को चुनौती वाली पुरकायस्थ की अर्जी खारिज की

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न्यूजक्लिक मामला: न्यायालय ने यूएपीए मामले में गिरफ्तारी को चुनौती वाली पुरकायस्थ की अर्जी खारिज की

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  • Publish Date - October 13, 2023 / 05:50 PM IST,
    Updated On - October 13, 2023 / 05:50 PM IST

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज एक मामले में ‘न्यूजक्लिक’ के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ तथा पोर्टल के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख अमित चक्रवर्ती की गिरफ्तारी और उसके बाद पुलिस हिरासत में भेजे जाने के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

पुरकायस्थ और चक्रवर्ती ने दलील दी कि जब उन्हें पकड़ा गया तो गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया और निचली अदालत ने उनके अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति में हिरासत में भेजने का आदेश पारित किया था।

याचिकाओं को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने कहा कि गिरफ्तारी के संबंध में कानूनी या संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन या कोई ‘प्रक्रियात्मक खामी’ नहीं है और हिरासत में भेजने का आदेश कानून सम्मत है।

न्यायमूर्ति ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी के कारणों के बारे में ‘‘सूचित’’ किया जाना जरूरी है और यूएपीए में लिखित रूप से ऐसा करना अनिवार्य नहीं है।

हालांकि, न्यायालय ने कहा कि यह ‘‘सलाह’’ दी जाती है कि पुलिस ‘‘संवेदनशील सामग्री’ को संशोधित कर लिखित रूप में गिरफ्तारी का आधार बताएं।

न्यायालय ने पोर्टल के संस्थापक की याचिका पर पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘याचिका के किसी भी तरह से योग्य नहीं होने के कारण खारिज की जाती है।’

अदालत ने कहा, ‘‘पूरे मामले की सही परिदृश्य से जांच करने के बाद, अब तक ऐसा प्रतीत होता है कि गिरफ्तार करने के बाद याचिकाकर्ता को कार्रवाई के आधारों के बारे में यथाशीघ्र बता दिया गया था और इसी तरह, इस यूएपीए की धारा 43बी या भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(1) के प्रावधानों का उल्लंघन या कोई प्रक्रियात्मक खामी प्रतीत नहीं होती है और गिरफ्तारी भी कानून सम्मत है़।’’

अदालत ने कहा कि यूएपीए के तहत अपराध सीधे तौर पर देश के स्थायित्व, अखंडता और संप्रभुता को प्रभावित करता है और इसीलिए केवल गिरफ्तारी के आधार की जानकारी देना जरूरी है।

पुरकायस्थ और चक्रवर्ती को दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने तीन अक्टूबर को गिरफ्तार किया था।

बाद में उन्होंने गिरफ्तारी और सात दिन की पुलिस हिरासत के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और अंतरिम राहत के तौर पर तत्काल रिहाई की मांग की।

निचली अदालत ने 10 अक्टूबर को उन्हें दस दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

उनके खिलाफ प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि भारत की ‘‘संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने’’ और देश में असंतोष पैदा करने के लिए समाचार पोर्टल को चीन से बड़ी राशि मिली थी।

इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने के लिए पुरकायस्थ ने ‘पीपुल्स अलायंस फॉर डेमोक्रेसी एंड सेक्युलरिज़्म’ (पीएडीएस) समूह के साथ मिलकर साजिश रची थी।

भाषा खारी पवनेश

पवनेश

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