New Labour Code: घट जाएगी प्राइवेट नौकरी वालों की इनहैंड सैलरी? कल से देशभर में लागू होगा नया श्रम कानून, जानिए लाखों कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?

Ads

घट जाएगी प्राइवेट नौकरी वालों की इनहैंड सैलरी? कल से देशभर में लागू होगा नया श्रम कानून, New Labour Code implemented For Private Employees

  •  
  • Publish Date - March 31, 2026 / 06:36 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 06:37 PM IST

नई दिल्लीः New Labour Code नौकरीपेशा लोगों के लिए 1 अप्रैल 2026 से कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। देश की बड़ी कंपनियां नए श्रम कानून (न्यू लेबर कोड) लागू करने की तैयारी में हैं, जिससे कर्मचारियों के वेतन ढांचे, काम के घंटे और अन्य सुविधाओं पर व्यापक असर पड़ेगा। केंद्र सरकार द्वारा पुराने श्रम कानूनों की जगह बनाए गए चार नए लेबर कोड के लागू होने के साथ ही सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नए नियमों के तहत बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत रखना अनिवार्य हो सकता है। इससे कर्मचारियों का पीएफ (PF) योगदान बढ़ेगा, लेकिन टेक-होम सैलरी घट सकती है।

सैलरी और PF पर असर

New Labour Code नए प्रावधानों के अनुसार कंपनियां अब भत्तों को कुल सैलरी के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं रख सकेंगी। इससे बेसिक सैलरी बढ़ेगी, जिसके चलते पीएफ और ग्रेच्युटी की राशि में इजाफा होगा, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी कम हो सकती है। नए लेबर कोड के तहत सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। साथ ही समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना भी कानूनी बाध्यता होगी। इसके अलावा देशभर में न्यूनतम वेतन लागू करने का प्रावधान है।

एक साल में ग्रेच्युटी का लाभ, महिलाओं और ट्रांसजेंडर के लिए प्रावधान

अब तक ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल की नौकरी जरूरी थी, लेकिन नए नियमों के तहत केवल एक साल की सेवा के बाद भी ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा। यह सुविधा फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों पर भी लागू होगी, जिन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान लाभ मिलेंगे। नए कानून में कामकाजी महिलाओं को उनकी सहमति के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते कार्यस्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों। इसके अलावा समान वेतन और सम्मान का अधिकार सुनिश्चित किया गया है। ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को भी समान अवसर और अधिकार दिए जाएंगे।

काम के घंटे और ओवरटाइम, गिग वर्कर्स को पहली बार पहचान

नए नियमों के तहत सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम तय किया गया है, जबकि एक दिन में 8 घंटे काम के आधार पर वेतन तय होगा। ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन देना अनिवार्य होगा। यह प्रावधान खासकर मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, लॉजिस्टिक्स और आईटी सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है। नए लेबर कोड के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी पहचान मिलेगी। उन्हें पीएफ, बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं दी जाएंगी। साथ ही एग्रीगेटर कंपनियों को अपने टर्नओवर का 1-2 प्रतिशत (अधिकतम 5 प्रतिशत तक) इन कामगारों के लिए देना होगा।

इन्हें भी पढ़ेंः-

शीर्ष 5 समाचार