Chaitra Navratri 2022 : Worship Maa Shailputri

नवरात्रि के पहले दिन इस विधि से करें मां शैलपुत्री की पूजा, हर काम में मिलेगी सफलता, गरीबी हो जाएगी दूर

Chaitra Navratri 2022 : Worship Maa Shailputri: जीवन में स्थिरता तभी आता है, जब वह संपूर्ण होता है यानी स्वस्थ, सुखी और खुशहाल

Edited By :   November 29, 2022 / 08:50 PM IST

धर्म। Chaitra Navratri 2022 : Worship Maa Shailputri on the first day of Navratri: चैत्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा की तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरूआत हो जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार आज से हिंदू नववर्ष यानी नवसंवस्तर की शुरूआत होती है। आज शनिवार है, इसके अलावा आज रेवती़ नक्षत्र दिन 11 बजकर 21 मिनट तक, चंद्रमा मीन राशि में रहेगा। आज का राहुकाल दिन को 09 बजकर 02 मिनट से 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।

 

पहले दिन शैलपुत्री की पूजा
चैत्र नवरात्र आरम्भ होने से प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ ही माँ दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है। पहले दिन माँ दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। शैलपुत्री अर्थात पहाड़, पत्थर मतलब स्थिरता व पवित्रता. जीवन में स्थिरता तभी आता है, जब वह संपूर्ण होता है यानी स्वस्थ, सुखी और खुशहाल। स्वास्थ्य ही नहीं, अगर करियर भी अस्थिरता झेल रहा है तो शांत नहीं हुआ जा सकता है। बात चाहे, करियर की हो, प्रेम संबंधों की हो या स्वास्थ की। अगर आपके संबंध खोखले हो गए हैं या उनमें पहले की तरह उत्साह नहीं रहा है, या स्वस्थ खराब हो अथवा सब होते हुए सुख की अनुभूति न रह जाये तो हिमालय जैसा शांत और स्थिर रहना मुश्किल है।

Chaitra Navratri 2022 : Worship Maa Shailputri on the first day of Navratri:  :  स्थिर स्वभाव वाला व्यक्ति सतोगुण से जुडा होता है वह क्षण भंगुर तुच्छ पदार्थो से झुठी प्रशंसा मे विश्वास नही रखता. अस्थिर स्वभाव का व्यक्ति तमो गुण से युक्त होता है ऐसे व्यक्ति को तुच्छ पदार्थो की लोलुपता, झुठी प्रशंसा अत्यधिक प्रिय होती है इस दुष्प्रव्रत्ति के दुष्प्रभाव के कारण उन्हें जीवन मे कई बार परोक्ष अपरोक्ष रुप से हानिया उठानी पडती है परन्तु वे स्वंय के स्वभाव के बारे मे चिंतन करने के बजाय परिस्थितियो को तथा दूसरो को दोष देते है स्थिर स्वभाव, सन्तुलित व्यवहार के धनी लोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे सफलता पाते हैं स्थिर स्वभाव, सन्तुलित व्यवहार की प्राप्ति कैसे हो? जीवन मे सात्विकता सच्चे अर्थो मे अध्यात्म धारण करने वाले व्यक्ति को स्वभाव मे स्थिरता प्राप्त हो सकती है स्वभाव मे स्थिरता के कारण जीवन के बहुआयामी क्षेत्र मे प्रगति होती रहती है इसलिये यह आवश्यक है कि हम अपने स्वभाव मे स्थिरता और व्यवहार मे सन्तुलन रखे. और इसके लिए आज माँ शैलपुत्री की पूजा और आराधना करें. माँ शैलपुत्री की आराधना से स्थिरता और शुद्धता प्राप्त किया जा सकता है।

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इन मंत्रों का करें जाप

माँ दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा – स्थिरता और सुमंगल –
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्॥

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पूजन विधि इस प्रकार है-
सबसे पहले चौकी पर माता शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका(सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें।

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इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां शैलपुत्री सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्धय, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

 

हमारे जीवन प्रबंधन में दृढ़ता, स्थिरता व आधार का महत्व सर्वप्रथम है। अत: नवरात्रि के पहले दिन हमें अपने स्थायित्व व शक्तिमान होने के लिए माता शैलपुत्री से प्रार्थना करनी चाहिए। शैलपुत्री का आराधना करने से जीवन में स्थिरता आती है। हिमालय की पुत्री होने से यह देवी प्रकृति स्वरूपा है। उनकी पूजा से जीवन में श्रेष्ठता, स्थिरता और सुमंगल होता है।

 
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