नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बृहस्पतिवार को संकट तब और गहरा गया जब राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बराइक ने उच्च सदन और पार्टी, दोनों से इस्तीफ़ा दे दिया। वह इस सप्ताह पार्टी छोड़ने वाले तीसरे टीएमसी सांसद हैं, जबकि शत्रुघ्न सिन्हा, बाबुल सुप्रियो और सौगत रॉय जैसे वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
पार्टी के भीतर आज नयी दरारें भी देखने को मिलीं, जब वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला किया और कहा कि वह पार्टी में तभी बने रह पाएंगे जब अभिषेक को सभी नेतृत्व पदों से हटा दिया जाएगा।
सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव के बाद, बृहस्पतिवार को बराइक टीएमसी के तीसरे ऐसे सांसद बन गए जिन्होंने राज्यसभा और पार्टी, दोनों से इस्तीफ़ा दे दिया।
बाद में, भाजपा नेता निशिकांत दुबे के घर के बाहर बराइक ने पत्रकारों से कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल की जनता ने भाजपा को अपना जनादेश दिया है। टीएमसी नहीं जीती। पश्चिम बंगाल की जनता के जनादेश को देखते हुए, मैं पार्टी से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ।’’
बाद में उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘जनता की राय को ध्यान में रखते हुए मैंने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया।’’
बराइक ने कहा, ‘‘विकास के लिए केंद्र और राज्य का एकमत होना ज़रूरी है। हमने वाम दलों के शासन में 34 साल और टीएमसी के शासन में 15 साल गंवा दिए, जब राज्य और केंद्र के बीच कोई सहयोग नहीं था।’’
उन्होंने कहा कि ऐसे राजनीतिक मतभेदों का खामियाजा गरीबों को ही भुगतना पड़ता है।
बराइक ने कहा, ‘‘नयी सरकार ने अपनी पहली बैठक में मेडिकल कॉलेजों और एम्स के लिए प्रस्ताव पेश किए। सिलीगुड़ी से दिल्ली तक बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणाएं भी की गईं। हमें विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। हम गरीब परिवारों से आते हैं और मैं चाय बागान में काम करने वाले एक मज़दूर का बेटा हूँ।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशों के अनुसार काम करूंगा। मैं उस जगह के लोगों के लिए काम करना चाहता हूं, जहां से मैं आता हूं।’’
इस बीच, कई सांसद ममता बनर्जी के समर्थन में सामने आए। इनमें अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा भी शामिल हैं, जिनका नाम कथित बागी सांसदों की सूची में था।
सिन्हा ने कहा कि वह मुश्किल समय में टीएमसी प्रमुख का साथ नहीं छोड़ेंगे।
पश्चिम बंगाल के आसनसोल से तृणमूल सांसद सिन्हा ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि हो सकता है कि कुछ लोगों ने मजबूरी, डर या लालच की वजह से ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया हो, लेकिन उनका सैद्धांतिक रुख यह है कि वह न तो पार्टी का साथ छोड़ेंगे और न ही अपनी नेता का।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं खुद के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर रहा हूं — मैं टीएमसी और ममता जी के साथ था, मैं टीएमसी और ममता जी के साथ हूं तथा मैं टीएमसी और ममता जी के साथ ही रहूंगा। मेरा कहीं और जाने का कोई इरादा नहीं है।’’
सिन्हा पूर्व में भाजपा नेता होने के साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री भी थे।
उन्होंने बृहस्पतिवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कार्यकाल के 12 साल पूरे होने पर बधाई भी दी, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज़ हो गईं।
टीएमसी में शामिल होने से पहले सिन्हा कुछ समय तक कांग्रेस के साथ भी रहे और 2019 का लोकसभा चुनाव पटना साहिब से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा।
सिन्हा ने कहा, ‘‘मैं मुश्किल समय में ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ूंगा। 2019 में जब मैं पटना साहिब से लोकसभा चुनाव हारा – या यूं कहें कि मुझे हराया गया – तो बहुत कम लोग मेरे साथ खड़े थे, और ममता बनर्जी उनमें से एक थीं।’’
उन्होंने कहा कि भले ही सभी राजनीतिक दलों में उनके दोस्त हैं, लेकिन वह बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे।
सिन्हा ने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से मेरे बारे में काफ़ी अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोग सच कह रहे हैं, तो कुछ अफ़वाहें फैला रहे हैं। कुछ लोगों का दावा है कि मैं तथाकथित बागी गुट में शामिल हो गया हूँ।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन लोगों का भी आभारी हूं जिन्होंने मुझे टीएमसी के बागी गुट में शामिल होने के लिए बुलाया। सभी मेरे दोस्त हैं, उनसे मुझे कोई शिकायत नहीं है। लेकिन मेरा सैद्धांतिक रुख यह है कि मुझे अब ममता बनर्जी के साथ खड़ा होना चाहिए। फिलहाल, मैं अपना रास्ता नहीं बदलूंगा।’’
इस बीच, पूर्व में भाजपा में रहे राज्यसभा सदस्य बाबुल सुप्रियो ने स्पष्ट किया कि वह ममता बनर्जी के खेमे के साथ हैं।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इस सारी उलझन और अफ़वाहों के बीच, मैं यह साफ़ कर देना चाहता हूँ कि मैं न तो किसी गुट में शामिल हो रहा हूँ और न ही किसी दूसरी पार्टी में। मुश्किल समय में जहाज छोड़कर जाना ठीक नहीं है।’’
टीएमसी की लोकसभा सदस्य प्रतिमा मंडल ने भी किसी बागी गुट का हिस्सा होने से इनकार किया।
लोकसभा सदस्य ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘जो झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, वे अच्छी नहीं हैं – न तो उन लोगों के लिए जिन्होंने मुझे चुनाव में चुना और न ही मेरे लिए। मैं तो दिल्ली भी नहीं गयी हूँ।’’
वहीं, टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने आज कहा कि उन्हें भी पार्टी से कुछ शिकायतें हैं, लेकिन डूबते हुए जहाज को छोड़ना ‘‘नैतिकता’’ नहीं है।
रॉय ने इस हफ़्ते की शुरुआत में कहा था कि उन्हें बागी सांसदों के साथ जुड़ने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।
बराइक के इस्तीफ़े पर टिप्पणी करने के लिए कहे जाने पर रॉय ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘हो सकता है कि उन्हें कुछ शिकायतें रही हों।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें भी पार्टी से कोई शिकायत है, टीएमसी के वरिष्ठ सांसद ने कहा, ‘‘मुझे भी शिकायत है; मेरी एक छोटी सी शिकायत है, लेकिन इसके लिए पार्टी छोड़ना सही नहीं होगा। मेरी शिकायत यह है कि हमसे सलाह नहीं ली जाती; हम बुजुर्ग लोग हैं।’’
पार्टी के लिए मौजूदा हालात को ‘‘मुश्किल’’ बताते हुए रॉय ने कहा, ‘‘देखते हैं कितने लोग हिम्मत दिखाते हैं।’’
भले ही रॉय ने कहा कि वह पार्टी के साथ हैं, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ममता बनर्जी का समर्थन जारी रखेंगे, तो उन्होंने वर्तमान पर ध्यान देने पर ज़ोर दिया।
पार्टी की सबसे तीखी आलोचना लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी ने की।
कल्याण ने बृहस्पतिवार को ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दिया कि वह अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनके जैसे अनुभवी नेताओं में से किसी एक को चुनें। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पर ‘‘अहंकार’’ और ‘‘अस्थिर मानसिकता’’ का आरोप लगाया।
वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण ने यह भी घोषणा की कि वह अभिषेक से संबंधित सभी कानूनी मामलों और अदालती याचिकाओं से खुद को अलग कर लेंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से संबंधित मामलों को लड़ना जारी रखेंगे।
वह कलकत्ता उच्च न्यायालय में सीआईडी जांच से जुड़े हस्ताक्षर जालसाजी मामले में अभिषेक का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
दोनों नेताओं के बीच अनबन तब चरम पर पहुँच गई जब कल्याण को कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि डायमंड हार्बर से सांसद (अभिषेक बनर्जी) ने एक अलग रिट याचिका दायर की है, जो एजेंसी द्वारा ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास में बने टीएमसी कार्यालय और अभिषेक के कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय में की गई तलाशी के संबंध में दायर की गई है।
श्रीरामपुर से लोकसभा सदस्य ने अभिषेक पर जमकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उन्होंने (अभिषेक) उनके ‘‘45 साल के पेशेवर अनुभव’’ के प्रति ‘‘कोई सम्मान नहीं दिखाया।’’
कल्याण बनर्जी ने कहा कि अब गेंद ममता बनर्जी के पाले में है कि वह टीएमसी को अपने भतीजे के साथ चलाना चाहती हैं या फिर उनके जैसे पार्टी के वफादारों के साथ।
कल्याण ने कहा, ‘‘मैं इस पार्टी में केवल तभी रहूँगा जब अभिषेक को सभी नेतृत्व पदों से हटा दिया जाए और उन्हें केवल एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में रखा जाए। अभिषेक, जो वरिष्ठों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और जिनका रवैया किसी ‘बॉस’ जैसा है, वह पार्टी में मेरे नेता नहीं हो सकते। यदि वह नेता बने रहते हैं, तो मेरे लिए टीएमसी में बने रहना संभव नहीं होगा।”
इस बीच, टीएमसी से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि बागी विधायकों की संख्या अब 64 हो गई है, जो पहले 58 थी, और यह संख्या बढ़ रही है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के अंदर हुई बगावत के कारण टीएमसी संकट का सामना कर रही है। इस बगावत ने पार्टी की संगठनात्मक और विधायी ताकत को काफी कमजोर कर दिया है। पिछले हफ्ते, पार्टी के दो-तिहाई से ज़्यादा विधायकों – 80 में से 58 ने आधिकारिक टीएमसी विधायक दल से अलग होकर, पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी गुट के तौर पर मान्यता हासिल कर ली।
बाद में, यह संकट संसद सदस्यों तक भी पहुँच गया, जहाँ काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बागी सांसदों ने 20 से ज़्यादा लोकसभा सदस्यों के समर्थन का दावा किया।
भाषा नेत्रपाल शफीक
शफीक