Gwalior News : मंदिर सरकारी संपत्ति है, हाईकोर्ट ने इस मामले में खारिज की याचिका, पुजारी को लगाई फटकार

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 03:15 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 03:51 PM IST
HIGHLIGHTS
  • रामजानकी मंदिर जमीन विवाद में पुजारी का दावा खारिज
  • रिकॉर्ड में “मंदिर श्री रामजी” को ही मालिक बताया गया
  • कोर्ट ने कहा- पुजारी सिर्फ प्रबंधक, मालिक नहीं

ग्वालियरGwalior News : एमपी के ग्वालियर के रामजानकी मंदिर की जमीन के फर्जीवाड़े का मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है, कोर्ट ने पुजारी की याचिका खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि मंदिर सरकारी संपत्ति है और पुजारी केवल प्रबंधक होता है, मालिक नहीं।

पंडित कैलाश नारायण दीक्षित ने कोर्ट में दावा किया था कि, चावड़ी बाजार स्थित म्युनिसिपल भवन उनके पूर्वजों के समय से उनके स्वामित्व में है (Gwalior News)। जिस पर कोर्ट ने पुराने रिकॉर्ड तलब किए। तो सामने आया कि 1960 से 1976 तक के दस्तावेजों में संपत्ति के मालिक के रूप में सिर्फ मंदिर श्री रामजी दर्ज था और उस पर टैक्स भी माफ था।

दस्तावेज में साबित हुआ कि वादी के दादा बाबूलाल दीक्षित को मंदिर में पूजा-अर्चना के बदले 15 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता था (Gwalior News)। हाईकोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति वेतनभोगी पुजारी है, वह संपत्ति का स्वामी नहीं हो सकता।

 

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कोर्ट ने पुजारी के दावे को क्यों खारिज किया?

क्योंकि पुराने सरकारी रिकॉर्ड में संपत्ति मंदिर के नाम दर्ज थी, न कि पुजारी या उसके परिवार के नाम।

क्या पुजारी मंदिर की संपत्ति का मालिक हो सकता है?

नहीं, कोर्ट के अनुसार पुजारी केवल प्रबंधक या सेवक होता है, मालिक नहीं।

इस मामले में कौन-कौन से सबूत अहम रहे?

1960–1976 के राजस्व रिकॉर्ड और वेतन से जुड़े दस्तावेज अहम साबित हुए।

क्या मंदिर की संपत्ति पर टैक्स लगता था?

नहीं, दस्तावेजों के अनुसार इस पर टैक्स में छूट थी।

इस फैसले का क्या महत्व है?

यह फैसला धार्मिक संपत्तियों पर निजी स्वामित्व के दावों को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी उदाहरण पेश करता है।